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एफ़.पी.आई.सी. की मूल भावना

एफ़.पी.आई.सी. का अर्थ है कि भावी विकास के बारे में सामुदायिक निर्णय हैं, इसमें शामिल हैं:

  • स्वतंत्र, सरकारों, कंपनियों, राजनीतिक दलों, और गैर सरकारी संगठनों जैसे तृतीय पक्षों द्वारा ज़बरदस्ती और हेरफेर से मुक्त. समुदाय के भीतर "कुलीनों" द्वारा हेरफेर से भी मुक्त; जिसमें पहुंच प्रक्रियाओं का समावेशीहोना महत्वपूर्ण हैं.
  • पूर्व गतिविधियों के प्रारंभ से पहले पूर्व में निर्धारित किया गया है कि समुदायों को भी उतना समय दिया जाना चाहिए जितना कि उन्हे विकल्पों को पूरी तरह से समझने, उनपर विचार करने तथा किसी निर्णय पर पहुंचने के लिए आवश्यक है.
  • सूचित, उन सभी सूचनाओं को समुदायों के साथ मिलकर उन माध्यमों से प्राप्त करना जिन्हें वे विश्वसनीय, सुलभ और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त मानते हैं.
  • उन सभी सूचनाओं को समुदायों के साथ मिलकर उन माध्यमों से प्राप्त करना जिन्हें वे विश्वसनीय, सुलभ और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त मानते हैं. सहमति

एफ़.पी.आई.सी. का अर्थ है सहमति. समुदायों के लिए, एफ़.पी.आई.सी. का तात्विक महत्व और शक्ति सिर्फ परामर्श देने में नहीं है, बल्कि यह सहमति देने या इसे वापस लेने की क्षमता में निहित है. देशज समुदायों के पास नहीं (या, हाँ या फिर शर्तों के साथ हाँ ’कहने की क्षमता होनी चाहिए). यह एक परियोजना के सभी चरणों के लिए सच है.

यह मार्गदर्शिका "एफ़.पी.आई.सी. के मूल सिद्धांत" का बार-बार हवाला देती है, जिनमें निम्नलिखित का उल्लेख किया गया हैं:

  • एफ़.पी.आई.सी. कोई "बॉक्स में संकेत चिन्ह" लगाने वाला गतिविधि नहीं है. एफ़.पी.आई.सी. ढेर सारे मानवाधिकार और उनके सुरक्षा उपायों को शामिल करता है - जिसमें आत्मनिर्णय का अधिकार; स्वतंत्र ढंग से आर्थिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने तथा उनमें सार्थक भागीदारी करने जैसी बातें शामिल हैं. “एफ़.पी.आई.सी. के मूल सिद्धांत” के साथ संचालन का अर्थ है इन अधिकारों को पहचानना और उनकी अभिव्यक्ति को समर्थन देना.
  • एफ़.पी.आई.सी. का अर्थ है सहमति. समुदायों के लिए, एफ़.पी.आई.सी. का तात्विक महत्व और शक्ति सिर्फ परामर्श देने में नहीं है, बल्कि यह सहमति देने या इसे वापस लेने की क्षमता में निहित है. देशज समुदायों के पास नहीं (या, हाँ या फिर शर्तों के साथ हाँ ’कहने की क्षमता होनी चाहिए). यह एक परियोजना के सभी चरणों के लिए सच है
  • एफ़.पी.आई.सी. एक बारगी निर्णय नहीं है. किसी परियोजना के पूरे जीवनकाल के प्रत्येक चरणों में औपचारिक सहमति अवश्य प्राप्त की जानी चाहिए. प्रमुख निर्णयों के बीच, "एफ़.पी.आई.सी. भावना" के साथ संचालन का अर्थ है कि तय प्रोटोकॉल, प्रक्रियाओं, सक्रियता और सम्मान के साथ सहमति को बनाए रखना. इसलिए समुदायों को इसके बारे में बताया जाता है. उनके ज्ञान और वरियताओं को परियोजना संचालन में शामिल किया जाता है, और किसी भी प्रकार के संघर्ष या शिकायतें उठती हैं, तो उन्हें सार्थक रूप से निपटाने की कोशिश की जाती है. समय के साथ परियोजनाएं और समुदाय बदलते रहते हैं; इसलिए समझौतों में भी बदलाव करने की ज़रूरत होती है.
  • एफ़.पी.आई.सी. सिद्धांतों को शामिल करने में कभी बहुत अधिक देर नहीं हुई होती है. परियोजना के विकास के अग्रांत चरण की योजना रिश्तों को अच्छा बनाने के लिए सबसे अच्छी स्थिति पैदा करती है और एक परियोजना के लिए सच्ची सहमति तैयार करती है. हालांकि, यह हमेशा संभव नहीं है, जैसे कि उस स्थिति में जब परियोजना स्थल पर मध्यस्तरीय विकास का काम चल रहा हो. इन दृष्टांतों में, परियोजना स्थल पर परिवर्तन या विस्तार प्रस्तावित होने की स्थिति में एफ़.पी.आई.सी. का कार्यान्वयन सक्रिय हो सकता है, संबंधों को स्थापित किया जा सकता, उनमें सुधार हो सकता हो सकता है तथा उन्हे सुदृढ़ बनाया जा सकता है; और नए समझौते किए जा सकते हैं. यद्यपि शुरू से ही अच्छे समझौतों को विकसित करने को प्रमुखता से वरीयता दी जाती है, लेकिन विरासत में मिलने वाले विफल समझौतों से या जहाँ कंपनी-समुदाय संबंध स्थिर हो गए हैं, वहाँ सब कुछ खत्म नहीं हो जाता है. यथास्थिति का एक ईमानदार और पारदर्शी मूल्यांकन रिश्तों के सक्रियता को फिर से स्थापित करने में एक आवश्यक पहला कदम हो सकता है, और नए सामूहिक लक्ष्यों और निगरानी तंत्र स्थापित करने का अवसर पैदा कर सकता है.