पूर्व-संभावना चरण की महत्वपूर्ण अनिश्चितता हर किसी को चुनौती दे सकती है.

कंपनियों को इस बारे में स्पष्टवादी होना चाहिए कि भावी परियोजनाओं के बारे में वे क्या जानते हैं और क्या नहीं. अन्वेषण और इस तरह के लाभों से संभावित परिणामों के बारे में समुदाय के भीतर बढ़ी हुई उम्मीदें कॉर्पोरेट वादों पर समुदाय के भरोसा करने की क्षमता को कम कर देंगी. उसी समय, गोपनीयता की भावना अनादर और बेईमानी का

  • क्षेत्र में देशज लोगों की पहचान हमेशा आसान नहीं होता है. कुछ मामलों में, सरकारें सभी को देशज के बतौर स्वीकार नहीं करती हैं, या फिर किसी को भी देशज स्वीकार नहीं करती हैं. कई अन्य मामलों में कई तरह के कारणों से एक समुदाय मुखर रूप से अपनी स्वयं की पहचान एक देशज के रूप में नहीं कर सकता है (जबकि उन्होंने कभी भी देश पर उपनिवेशीकरण का कलंक नहीं लगने दिया है). ये परिस्थितियाँ एफ़.पी.आई.सी. में वर्णित उनके अधिकार को नहीं नकारते हैं.
  • समुदायों को सामान्य से अधिक संख्या में फ़ैसलोंका सामना करना पड़ सकता है और वे कंपनियों से स्वतंत्र कानूनी, मानवविज्ञानी, या अन्य विशेषज्ञ सलाह पाने में सहयोग का अनुरोध कर सकते हैं. कभी-कभी समय सबसे महत्वपूर्ण श्रोत बन जाता है जिसे अन्य गतिविधियों में लगाया जा सकता है. कंपनियाँ बच्चों की की देखभाल तथा भोजन प्रदान करने में सक्षम बन सकती हैं, ताकि समुदाय के महिला सदस्यों के लिए चर्चा में हिस्सा लेना और निर्णय प्रक्रिया में भागीदार बनना उनके लिए बोझिल न बने.
  • क्षेत्र में ऐतिहासिक निष्कासन गतिविधियों के कारण समुदायों में पहले से ही मौजूद धारणाएं या चिंताएँ हो सकती हैं. उनके पास यह सवाल भी हो सकता है कि औद्योगिक परियोजनाओं का विकास कैसे होता है और समुदाय के लिए, उनके प्राकृतिक संसाधनों और जीवन के तरीके के संबंध में इसके क्या निहितार्थ हो सकते हैं.
  • कंपनियों के पास बहुत सारे जवाब नहीं हो सकते हैं, क्योंकि वे इस चरण में यह समझने की कोशिश कर रहे होते हैं कि क्या भू वैज्ञानिक, पर्यावरण और सामाजिक दृष्टिकोण से एक श्रोत परियोजना संभव है. वे स्थानीय समुदायों के इतिहास, संस्कृति और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं के परिप्रेक्ष्य में स्थानीयता भी सीख रहे होते हैं.
  • जो कंपनियाँ लाभों को बढ़ा-चढ़ाकर और जोखिमों को कम कर के बताती हैं, या निश्चितता को लेकर झूठी सूचना फैलाती हैं, तब ऐसे में परियोजनाओं का लाभ गिरने, अप्रत्याशित प्रभाव उत्पन्न होने, और जोखिम का ठीक ढंग से प्रबंधन नहीं करने की स्थिति में कंपनियाँ समुदायों का विश्वास खो सकती हैं.
  • एफ़.पी.आई.सी. की भावना"एफ़.पी.आई.सी. की भावना" के अनुसार काम करने वाली कंपनियाँ इस बारे में पारदर्शिता की पेशकश कर सकती हैं कि वे क्या जानती हैं और क्या नहीं और जो सूचनाएँ उनके पास उपलब्ध हैं उनको साझा करने के क्रम में समझौते का सम्मान करती हैं. इस तरह से समुदाय के लिए (जिनके पास क्षेत्र के संबंध में व्यापक तकनीकी ज्ञान नहीं है) यह परियोजना को समझने में सहायक हो सकता है. अनिश्चितता के साथ भी इस बड़े परिदृश्य पर चर्चा करना महत्वपूर्ण है कि कैसे एक परियोजना अपने जीवनकाल में विस्तार पा सकती है या विकसित हो सकती है, समुदाय और बुनियादी ढांचे पर क्या संभावित प्रभाव सामने आ सकते हैं, इस तरह के प्रभावों का आकलन कैसे किया जाए तथा इस समस्या को कैसे हल किया जाए, और इसके समापन, विघटन, और पुनर्वास के लिए क्या प्रक्रियाएं अपरिहार्य हैं.
  • विश्व परिदृश्य अनुकूलता के लिए एक और महत्वपूर्ण मुद्दा है. देशज समुदाय दुनिया को देखने के अपने विचारों, पारिस्थितिक तंत्र स्थिरता के संबंध में अपने मूल्यों, सामाजिक और सांस्कृतिक जटिलता, स्वास्थ्य और अंतरपीढ़ी समता के आधार पर जटिल हैं. ये मूल्य देशज अर्थव्यवस्थाओं के लिए आधार हैं और मूल रूप से किसी परियोजना के विरोध में हो सकते हैं. इसे जल्दी समझ कर कंपनी गैर-व्यवहार्य परियोजना में महत्वपूर्ण निवेश को बचा सकती है.   

पूर्व-संभावना चरण में, समुदाय कंपनियों को सामुदायिक अधिकारों (जैसे, शिकार का अधिकार, मौजूदा संधियाँ आदि), भूमियों से संबंध या भूमियों पर सामूहिक हक़दारी, और निर्णय लेने के लिए उनकी परंपराओं या अपेक्षाओं के बारे में बता सकते हैं. इसके बदले में, समुदाय कंपनी से स्पष्ट और सुलभ जानकारी के लिए अनुरोध और उम्मीद कर सकते हैं. समुदाय को इस बात का भी संकेत देना चाहिए कि सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त प्रारूप में उन्हें इस जानकारी को इकट्ठा कर के देने के लिए कितना समय चाहिए. जिन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा करनी है, उसमें शामिल हैं परियोजना के विकास की प्रक्रियाओं को समझना, साथ ही साथ क्या जानकारी है और क्या अभी तक अनिश्चित है, क्या जानकारी मिलेगी और समुदाय से कब किस निर्णय की ज़रूरत होगी. अक्सर शुरुआती खोज एक छोटी कंपनी द्वारा किया जाता है जो विकास के लिए एक बड़े ऑपरेटर को संपत्ति बेचने की योजना बना सकती है, और समुदायों को कंपनी से संभावित विकास में उसकी इच्छित भूमिका के बारे में स्पष्टता लाने के लिए कहना चाहिए.

फ़ोटो साभार: डेबी एस्पिनोसा, लैंडेसा के सौजन्य से

समुदायों और कंपनियों को एक साथ काम करने की जरूरत हो सकती है ताकि दोनों ही नई जानकारीयाँ साझा करने के लिए, एक दूसरे को पर्याप्त समय देने के लिए, सदस्यों को सीखने और आंतरिक रूप से परामर्श करने में मदद देने के लिए और ज़रूरी निर्णय तथा निष्कर्ष पर पहुंचने हेतु सर्वोत्तम प्रारूपों, मंचों, और प्रक्रियाओं को प्राप्त कर सकें. उदाहरण के लिए, समुदाय "कार्यालय समय" में सवालों के नियमित रूप से जवाब देने के लिए के लिए कंपनी द्वारा एक प्रतिनिधि उपलब्ध कराने की सराहना कर सकते हैं, या समुदाय परिषद के कार्यक्रमों में सामयिक विकास पर लिखित या मौखिक जानकारी साझा करने का अनुरोध कर सकता है.

समुदाय भी कंपनी के चरित्र और उसके पिछले काम काज के तौर तरीकों को समझना चाहती है, जिसमें कंपनी की नीतियाँ और प्रतिबद्धताएं तथा दूसरे स्थानों पर कंपनी ने समुदायों और वातावरण के लिए उन्हे कैसे बरकरार रखा, शामिल हैं.

इसी समय, समुदायों के लिए इस बात को ध्यान में रखना मददगार हो सकता है कि यह एक पारस्परिक परिचय की अवधि है. इस अवधि में समुदाय स्थानीय आध्यात्मिक मूल्यों के क्षेत्र सहित संस्कृति और रीति- रिवाज़ों के बारे में कंपनियों को जानकारी दे सकते हैं "सामुदायिक प्रोटोकॉल" को व्यक्त करके समुदाय एक विशेष महत्व पा सकता है. समुदाय में कैसे निर्णय लिया जाता है और उस तक कैसे पहुँचता है, इस संबंध में निर्धारित प्रक्रियाएं, मूल्य और प्राथमिकताएं साधन के रूप काम करती हैं.

इस चरण में, समुदाय अपनी मूर्त और अमूर्त संपत्ति को परिभाषित कर सकते हैं (उदाहरण के लिए, महत्वपूर्ण पर्यावरणीय क्षेत्र, देव स्थान, ऐतिहासिक कथाओं का दस्तावेजीकरण करना या एकत्रित करना) और प्रारंभिक सामुदायिक प्राथमिकताओं की पहचान सकते हैं.  प्राथमिकताओं में आर्थिक या सामाजिक विकास के उद्देश्य, महत्वपूर्ण सुरक्षा के क्षेत्र या सांस्कृतिक विरासत की बहाली (जैसे, मूल भाषा प्रशिक्षण) शामिल हो सकते हैं.  हालाँकि परियोजना की संभावना की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, फिर भी यह जानकारी परियोजना आगे न बढ़ने की स्थिति में भी सहायक हो सकती है.

कभी-कभी समुदायों को ये जानकारीयाँ एक साथ लाने, अपनी क्षमता का निर्माण करने तथा उसको निखारने के लिए मदद की ज़रूरत होती है. कंपनियाँ संसाधनों को मुहैया कराने में सक्षम हो सकती हैं ताकि समुदाय अपनी सामुदायिक संरचनाओं को मजबूत कर सकें, कंपनियों की संरचनाओं और प्रक्रियाओं तथा परियोजना चक्रों को समझ सकें; या शोध करने और निर्णय लेने में सहयोग करने के लिए स्वतंत्र कानूनी सलाहकार, पारिस्थितिकी विशेषज्ञ, या अन्य विशेषज्ञों को काम पर रख सकें.

समुदायों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि इस चरण के लिए सामान्यत: यह आम बात है कि निगम के निर्णय में विकास से संबंधित परिणाम संभव नहीं है, इसलिए इस चरण के बारे में अपेक्षाएँ यथार्थवादी होनी चाहिए.

इस चरण में, जो कंपनियाँ एफ़.पी.आई.सी. के प्रति प्रतिबद्ध हैं (या फिर जो एफ़.पी.आई.सी. के प्रति प्रतिबद्धता के साथ किसी कंपनी को परियोजना बेचने की आशा रखते हैं), उन्हे यह समझना चाहिए कि भावी परियोजना की भौगोलिक संभावना, संभावित पर्यावरणीय, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभावों को समझने की शुरुआत के अलावा, उन्हें स्थानीय संदर्भ को समझना चाहिए और प्रारंभिक स्तर पर एक सकारात्मक संबंध स्थापित करके समुदाय के विश्वास को जीतने की शुरूआत करना चाहिए - और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परियोजना की बेचने की स्थिति में सभी समझौते को सम्मान दिया जाए.

एफ़.पी.आई.सी. देशज लोगों के मानवाधिकारों और उनके पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और आवश्यक कदम है. एफ़.पी.आई.सी. व्यवसाय के स्वस्थ संचालन और विविध देशज समुदायों के साथ स्वस्थ संबंध स्थापित करने का एक प्रारंभिक बिंदु है.

--नुसकमाता (जैकिंडा मैक), नुक्सलक और सिकवपेकम उत्तरी अमेरिका के देशज लोग

प्रासंगिक संदर्भ में स्थानीय इतिहास, भूमि अधिकार, वर्तमान और ऐतिहासिक भूमि उपयोग और स्वामित्व, औसत आय और आय के सामान्य श्रोत, निर्णय लेने की प्रक्रिया, कमजोर समूह और शक्ति का प्रभाव शामिल हैं. उद्योग की सामुदायिक धारणाओं में, जिनमें ऐतिहासिक तौर पर निकलने वाली गतिविधियाँ शामिल हैं, को समझा जाना चाहिए.

पहले क्रम की प्राथमिकता यह समझने की है कि कौन सा समुदाय या समुदायों का समूह संभावित विकास से प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें देशज लोगों के अधिकार शामिल हैं. कभी-कभी यह जटिल होता है, और यह तुरंत स्पष्ट नहीं होता है कि कौन से समुदाय एक संभावित परियोजना से प्रभावित हो सकते हैं. सरकारें देशज समुदायों को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं देती हैं, न ही भूमियों पर उनके परंपरागत अधिकार को महत्व देती हैं. अतीत के संघर्षों से समुदाय के वे सदस्य विस्थापित हुए हो सकते हैं जो वर्तमान में मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके पास विकास के लिए विचाराधीन क्षेत्रों में पारंपरिक रिश्ते और अधिकार हैं. कुछ समुदाय एक क्षेत्र को विस्तारित शिकार क्षेत्र के रूप में या मौसमी आधार पर क्षेत्र का उपयोग कर सकते हैं. जहाँ लिखित प्रमाण का अभाव हैं, या दावे परस्पर विरोधी हैं, ऐतिहासिक वर्णनात्मक अध्ययन जो शोध का डिज़ाइन तैयार करने और उसे संचालित करने के लिए समुदायों के साथ सहयोग करते हैं, अधिकार-धारक और हित-धारक पहचान को स्पष्ट कर सकते हैं और स्थानीय रीति-रिवाजों और मूल्यों (संरक्षण के लिए पर्यावरण और सांस्कृतिक प्राथमिकताओं को शामिल करते हुए) के संबंध में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकते हैं. समुदाय के अन्य सामाजिक और जनसांख्यिकीय डाटा (जैसे, जनसंख्या, घरों व जन्म दर का विवरण) को इकट्ठा किया जाना चाहिए और उसका लिखित दस्तावेज़ तैयार किया जाना चाहिए.

जब अधिकार-धारकों और हित-धारकों की पहचान कर ली जाती है, कंपनियाँ ज़मीनों तक अस्थाई तौर पर पहुंच बनाने हेतु जानकारी साझा करने और अनुमति लेने के लिए काम शुरू कर सकती हैं. निर्णयों की वैधता सुनिश्चित करने के लिए सामुदायिक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं पर एक सटीक समझ बनाना महत्वपूर्ण है. इसके अतिरिक्त, कंपनियों को समावेशी जुड़ाव और सूचना साझा करने के लिए सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त अवसरों का पता लगाना चाहिए. परियोजना की खोज और संचालन के दौरान भूमि और अन्य संसाधनों (जैसे, शिकार, खेती) का सामुदायिक उपयोग कैसे बदल सकता है, इस पर चर्चा करना आवश्यक है.

कंपनियों को इस बारे में स्पष्ट होना चाहिए कि संभावित परियोजनाओं के बारे में उन्हे क्या पता है और क्या नहीं. अन्वेषण और संभावित लाभों के परिणामों के बारे में अनुमान लगाकर समुदाय के लिए संभावित लाभ की उम्मीदों को बढ़ाना, कॉर्पोरेट वादों पर भरोसा करने की समुदाय की क्षमता को कम कर देगा. उसी समय, गोपनीयता की भावना अनादर और बेईमानी पैदा कर सकती है. जो कुछ भी सीखा जा रहा है, और जो कुछ भी अभी प्रश्न बना हुआ है तथा अतिरिक्त सूचना इकट्ठा करना, उसे साझा करने की सीमा के बारे नियमित अंतराल पर ईमानदारी से सामयिक जानकारी देना, ये सभी बातें आत्मविश्वास का आधार स्थापित करने तथा दो-तरफ़ा संचार का आधार बनाने में मदद कर सकती है. इसी समय, यह क्षण कंपनियों को समुदाय के बारे में जानने, रीति-रिवाजों को स्पष्ट करने के लिए प्रश्न पूछने, संभावित विकास के सापेक्ष सामुदायिक प्राथमिकताओं और मूल्यों को समझने (उदाहरण के लिए, वर्जित क्षेत्र, या बाद में लाभ-साझाकरण समझौतों में मूल्य जोड़ना) का अवसर उपलब्ध करा सकते हैं. यद्यपि प्रभावों और लाभों से संबंधित औपचारिक समझौते बाद के चरणों में उस समय होते हैं, जब इनके बारे में पूरी तरह से जानकारी हो पाती है. कंपनियाँ खोज चरण के तदनुरूप छोटी अवधि के समझौतों पर बातचीत करना और उसे लागू करना शुरू कर सकती हैं. सफल बातचीत और इन समझौतों के पूर्ण कार्यान्वयन से भविष्य में रिश्ते को मजबूत करने के लिए आवश्यक विश्वास, विकास की तेज अवस्था और संचालन का निर्माण हो सकता है.

पूर्व-संभावना स्रोत

Negotiations in the Indigenous World

Dr. Ciaran O’Faircheallaigh’s research reviews agreement outcomes based on analysis of 45 negotiations between Aboriginal peoples and mining companies across Australia. It also includes detailed case studies of four negotiations...

Community Protocols

Community protocols articulate the decision-making processes of an indigenous community clarify the protocol for how a company or government should approach a request for consent. Natural Justice worked with regional...

पूर्व-संभावना स्रोत

एफ़.पी.आई.सी. की मूल भावना

एफ़.पी.आई.सी. का अर्थ है कि भावी विकास के बारे में सामुदायिक निर्णय हैं, इसमें शामिल हैं:

  • स्वतंत्र, सरकारों, कंपनियों, राजनीतिक दलों, और गैर सरकारी संगठनों जैसे तृतीय पक्षों द्वारा ज़बरदस्ती और हेरफेर से मुक्त. समुदाय के भीतर "कुलीनों" द्वारा हेरफेर से भी मुक्त; जिसमें पहुंच प्रक्रियाओं का समावेशीहोना महत्वपूर्ण हैं.
  • पूर्व गतिविधियों के प्रारंभ से पहले पूर्व में निर्धारित किया गया है कि समुदायों को भी उतना समय दिया जाना चाहिए जितना कि उन्हे विकल्पों को पूरी तरह से समझने, उनपर विचार करने तथा किसी निर्णय पर पहुंचने के लिए आवश्यक है.
  • सूचित, उन सभी सूचनाओं को समुदायों के साथ मिलकर उन माध्यमों से प्राप्त करना जिन्हें वे विश्वसनीय, सुलभ और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त मानते हैं.
  • उन सभी सूचनाओं को समुदायों के साथ मिलकर उन माध्यमों से प्राप्त करना जिन्हें वे विश्वसनीय, सुलभ और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त मानते हैं. सहमति

एफ़.पी.आई.सी. का अर्थ है सहमति. समुदायों के लिए, एफ़.पी.आई.सी. का तात्विक महत्व और शक्ति सिर्फ परामर्श देने में नहीं है, बल्कि यह सहमति देने या इसे वापस लेने की क्षमता में निहित है. देशज समुदायों के पास नहीं (या, हाँ या फिर शर्तों के साथ हाँ ’कहने की क्षमता होनी चाहिए). यह एक परियोजना के सभी चरणों के लिए सच है.

यह मार्गदर्शिका "एफ़.पी.आई.सी. के मूल सिद्धांत" का बार-बार हवाला देती है, जिनमें निम्नलिखित का उल्लेख किया गया हैं:

  • एफ़.पी.आई.सी. कोई "बॉक्स में संकेत चिन्ह" लगाने वाला गतिविधि नहीं है. एफ़.पी.आई.सी. ढेर सारे मानवाधिकार और उनके सुरक्षा उपायों को शामिल करता है - जिसमें आत्मनिर्णय का अधिकार; स्वतंत्र ढंग से आर्थिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने तथा उनमें सार्थक भागीदारी करने जैसी बातें शामिल हैं. “एफ़.पी.आई.सी. के मूल सिद्धांत” के साथ संचालन का अर्थ है इन अधिकारों को पहचानना और उनकी अभिव्यक्ति को समर्थन देना.
  • एफ़.पी.आई.सी. का अर्थ है सहमति. समुदायों के लिए, एफ़.पी.आई.सी. का तात्विक महत्व और शक्ति सिर्फ परामर्श देने में नहीं है, बल्कि यह सहमति देने या इसे वापस लेने की क्षमता में निहित है. देशज समुदायों के पास नहीं (या, हाँ या फिर शर्तों के साथ हाँ ’कहने की क्षमता होनी चाहिए). यह एक परियोजना के सभी चरणों के लिए सच है
  • एफ़.पी.आई.सी. एक बारगी निर्णय नहीं है. किसी परियोजना के पूरे जीवनकाल के प्रत्येक चरणों में औपचारिक सहमति अवश्य प्राप्त की जानी चाहिए. प्रमुख निर्णयों के बीच, "एफ़.पी.आई.सी. भावना" के साथ संचालन का अर्थ है कि तय प्रोटोकॉल, प्रक्रियाओं, सक्रियता और सम्मान के साथ सहमति को बनाए रखना. इसलिए समुदायों को इसके बारे में बताया जाता है. उनके ज्ञान और वरियताओं को परियोजना संचालन में शामिल किया जाता है, और किसी भी प्रकार के संघर्ष या शिकायतें उठती हैं, तो उन्हें सार्थक रूप से निपटाने की कोशिश की जाती है. समय के साथ परियोजनाएं और समुदाय बदलते रहते हैं; इसलिए समझौतों में भी बदलाव करने की ज़रूरत होती है.
  • एफ़.पी.आई.सी. सिद्धांतों को शामिल करने में कभी बहुत अधिक देर नहीं हुई होती है. परियोजना के विकास के अग्रांत चरण की योजना रिश्तों को अच्छा बनाने के लिए सबसे अच्छी स्थिति पैदा करती है और एक परियोजना के लिए सच्ची सहमति तैयार करती है. हालांकि, यह हमेशा संभव नहीं है, जैसे कि उस स्थिति में जब परियोजना स्थल पर मध्यस्तरीय विकास का काम चल रहा हो. इन दृष्टांतों में, परियोजना स्थल पर परिवर्तन या विस्तार प्रस्तावित होने की स्थिति में एफ़.पी.आई.सी. का कार्यान्वयन सक्रिय हो सकता है, संबंधों को स्थापित किया जा सकता, उनमें सुधार हो सकता हो सकता है तथा उन्हे सुदृढ़ बनाया जा सकता है; और नए समझौते किए जा सकते हैं. यद्यपि शुरू से ही अच्छे समझौतों को विकसित करने को प्रमुखता से वरीयता दी जाती है, लेकिन विरासत में मिलने वाले विफल समझौतों से या जहाँ कंपनी-समुदाय संबंध स्थिर हो गए हैं, वहाँ सब कुछ खत्म नहीं हो जाता है. यथास्थिति का एक ईमानदार और पारदर्शी मूल्यांकन रिश्तों के सक्रियता को फिर से स्थापित करने में एक आवश्यक पहला कदम हो सकता है, और नए सामूहिक लक्ष्यों और निगरानी तंत्र स्थापित करने का अवसर पैदा कर सकता है.

Negotiations in the Indigenous World

Dr. Ciaran O’Faircheallaigh’s research reviews agreement outcomes based on analysis of 45 negotiations between Aboriginal peoples and mining companies across Australia. It also includes detailed case studies of four negotiations in Australia and Canada.

Community Protocols

Community protocols articulate the decision-making processes of an indigenous community clarify the protocol for how a company or government should approach a request for consent. Natural Justice worked with regional partners to support the development of community protocols for communities in in Argentina, India, Zimbabwe and Kenya. These protocols can support communities to constructively engage with industries in a way that safeguards community rights and creates accountability for their partners.